Female silhouette with setting sky and crescent moon in the background

नारीत्व

LANGUAGE: HINDI
WRITTEN AND TRANSLATED BY: JOLLY BHATTACHARJEE

मैं वो हूँ जो है चिंता की सीमा से परे,जिसे कोई बंधन घेरे

जिसकी सौमयता सब निहारे,मुश्किलों में जिससे सब पुकारे |

खोलकर अपने सोच की सीमा , मुझे उड़ने दो होकर निडर ,

चीत्कार कर उठता है मन जब नहीं करता है कोई मेरी कदर ||

 

कभी बनी माँ ,कभी पत्नी,बेटी या बहू,

सालों से सींचा है मैंने रिश्तों को देकर अपना लहू |

वजयी आत्मा है तैयार जीतने को धरती ,

शक्ति का प्रतीक आजकी हर एक लड़की ||

 

निष्पाप बचपन रहेगा जीवित हममें ,

सफलता पा चुकी मैं दफ्तारों और घरों में |

चड़ चुकी मैं पहाड़ , अंतरिक्ष को भी है मैंने छुआ ,

हाँ मैं हूँ , मैं वही हूँ , ईश्वर की अनमोल दुआ ||

 

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Womanhood

 

Unbound by ties, unlimited in thoughts,

With bountiful grace and depth that sorts

Unpack your imagination to discover the eternal beauty that lies within me

yes I am she, yes I am she

 

The victorious soul which conquers the world, the powerful face in every girl

I cross all odds to reach my dreams, when taken for granted my bleeding heart screams

The amaranthine child who never dies in me

yes I am she, yes I am she

 

I climbed mountains, I reached the space.

I am the queen, I am the God’s grace

Let me cherish womanhood and fathom the strength in me

yes I am she, yes I am she